मिडिल ईस्ट में संघर्ष के कारण लाखों बैरल तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है. आमतौर पर ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिलता है. लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग है. इसकी बड़ी वजह चीन है, जिसने हाल के महीनों में तेल आयात में भारी कमी की है. बाजार विश्लेषकों का कहना है कि चीन की घटती मांग ने आपूर्ति संकट के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया है, जिससे तेल की कीमतें नियंत्रित बनी हुई हैं.
तेल आयात में आई बड़ी गिरावट
उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, एक साल पहले चीन प्रतिदिन करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल आयात कर रहा था. हालिया महीनों में यह आंकड़ा घटकर लगभग 75 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है. ऊर्जा अनुसंधान कंपनियों के आंकड़े भी इसी रुझान की पुष्टि करते हैं. अप्रैल और मई में चीन के तेल आयात में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई. दुनिया की सबसे बड़ी तेल खरीदने वाली अर्थव्यवस्था में यह बदलाव वैश्विक कीमतों पर सीधा असर डाल रहा है.




