वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए तेल आयात के स्रोतों में लगातार बदलाव कर रहा है. ताजा उद्योग आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय अपने आयात बास्केट को और अधिक डाइवर्सिफाई यानी विविध बनाना शुरू कर दिया है. इस रणनीति के तहत जहां एक तरफ रियायती दरों पर मिलने वाले रूसी तेल की खरीदारी को बनाए रखा गया है, वहीं दूसरी तरफ खाड़ी देशों, विशेषकर यूएई के साथ व्यापारिक रिश्तों को एक नए स्तर पर ले जाया जा रहा है. यह संतुलन भारतीय अर्थव्यवस्था को अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले किसी भी बड़े प्राइस शॉक से बचाने के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है.
आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि रूस अभी भी भारतीय रिफाइनरों के लिए सबसे पसंदीदा स्रोत बना हुआ है. मई के महीने में भारत ने रूस से लगभग 19.2 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की खरीद की है. यह आंकड़ा भारत के कुल तेल आयात का तकरीबन 36.5 प्रतिशत बैठता है. इससे यह साफ है कि रूसी तेल पर मिलने वाला डिस्काउंट भारतीय कंपनियों के मुनाफे और देश की जरूरतों के लिहाज से अब भी बेहद अहम है. इस बीच सबसे बड़ा उलटफेर यूएई से होने वाली सप्लाई में दर्ज किया गया है. यूएई से भारत का तेल आयात पिछले कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचते हुए 9.42 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है. लगभग 41 फीसदी की इस भारी तेजी ने यूएई को भारत का दूसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना दिया है, जो भारत की सोची-समझी रणनीतिक विविधता का हिस्सा है.




