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छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू का बढ़ता प्रकोप

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रायपुर। प्रदेश में इस साल स्वाइन फ्लू (एच1एन1) के अब तक 110 मामले सामने आ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक जनवरी से अब तक के आंकड़ों के अनुसार वर्तमान में 19 मरीज सक्रिय हैं। राहत की बात यह है कि अधिकांश जिलों में संक्रमण के मामले सामने आने के बावजूद वहां फिलहाल कोई सक्रिय मरीज नहीं है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से सतर्कता बरतने की अपील की है और लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने कहा है।

आंकड़ों के अनुसार रायपुर में सबसे अधिक 56 संक्रमित मिले हैं, जिनमें सात मरीज अभी सक्रिय हैं। बिलासपुर में 12 मामले सामने आए हैं और दो सक्रिय मरीज हैं। धमतरी में सात संक्रमितों में चार सक्रिय हैं। दुर्ग में सात में दो, रायगढ़ में पांच में दो, कोरबा में पांच में एक और बेमेतरा में तीन मामलों में एक मरीज सक्रिय है।

बस्तर में दो, दंतेवाड़ा में एक, गरियाबंद में एक, जांजगीर-चांपा में दो, जशपुर में एक, महासमुंद में एक, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में एक, राजनांदगांव में दो, सूरजपुर में एक और सरगुजा में दो संक्रमित मिले हैं। इन जिलों में वर्तमान में कोई सक्रिय मरीज दर्ज नहीं है।

वहीं बालोदाबाजार-भाटापारा, बालोद, बलरामपुर-रामानुजगंज, बीजापुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोंडागांव, कोरिया, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, मुंगेली, नारायणपुर, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, सुकमा और उत्तर बस्तर कांकेर में फिलहाल सक्रिय मामला दर्ज नहीं है।

स्वाइन फ्लू में सामान्य तौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त की शिकायत भी हो सकती है। गंभीर स्थिति में सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या आक्सीजन स्तर कम होने जैसी समस्या हो सकती है।

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढंकें। हाथों को साबुन-पानी से नियमित रूप से धोएं और बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें। संक्रमित व्यक्ति के बहुत नजदीकी संपर्क से बचें और बीमारी के लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए। घर और आसपास पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना भी उपयोगी है।

फ्लू में सामान्य तौर पर बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना या बंद होना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगना और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मरीजों में उल्टी या दस्त की शिकायत भी हो सकती है। गंभीर स्थिति में सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द, अत्यधिक कमजोरी या आक्सीजन स्तर कम होने जैसी समस्या हो सकती है।

स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढंकें। हाथों को साबुन-पानी से नियमित रूप से धोएं और बिना हाथ धोए आंख, नाक और मुंह को छूने से बचें। संक्रमित व्यक्ति के बहुत नजदीकी संपर्क से बचें और बीमारी के लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचना चाहिए। घर और आसपास पर्याप्त वेंटिलेशन बनाए रखना भी उपयोगी है