अमेरिका-ईरान युद्ध से हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बाधित होने से भारत में तेल और गैस की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. देश में एलपीजी (LPG) के घटते स्टॉक को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब अब घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर में केवल 10 किलोग्राम गैस भरकर देने पर विचार कर रही है. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य कम उपलब्ध गैस को अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाना है.
कंपनियों के अनुमान के मुताबिक, 14.2 किलोग्राम का एक सिलेंडर औसतन 35–40 दिनों तक चलता है. वहीं, 10 किलोग्राम का सिलेंडर भी लगभग एक महीने तक चल सकता है. इस कटौती से जो गैस बचेगी, उससे उन घरों की मांग पूरी की जा सकेगी जहां सिलेंडर खत्म होने वाला है. यदि यह योजना लागू होती है तो सिलेंडरों पर नए स्टिकर लगाए जाएंगे और उनकी कीमत भी वजन के अनुपात में कम की जाएगी.
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का लगभग 60% हिस्सा आयात से पूरा करता है. एलपीजी की 90% आपूर्ति खाड़ी देशों से होती है. वर्तमान में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह बाधित हो गई है. खाड़ी देशों से आने वाले एलपीजी शिपमेंट की स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है. पिछले सप्ताह केवल दो जहाज ही गैस लेकर आए थे. इनमें कुल 92,700 टन एलपीजी आई. यह मात्रा भारत की महज एक दिन की खपत के बराबर है. वर्तमान में भारत के झंडे वाले छह एलपीजी टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं. डोनाल्ड ट्रम्प की ईरान को दी गई चेतावनी ने इस संकट को और गहरा कर दिया है.





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