कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट आई है. अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण मई की शुरुआत में क्रूड ऑयल का भाव 120 डॉलर प्रति बैरल की रिकॉर्ड ऊंचाई को छू गया था. हालांकि, उस ऐतिहासिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद से अब तक इसकी कीमतों में 20 फीसदी टूटकर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गई है. आम आदमी के लिए यह खबर किसी बड़ी राहत से कम नहीं है क्योंकि इससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल के बढ़ने की आशंका खत्म हो गई है.
12 जून को कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार गिरावट दर्ज की गई. ब्रेंट क्रूड 3.37 फीसदी का गोता लगाकर 87.33 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया. वहीं दूसरी तरफ, अमेरिकी बाजार का प्रतिनिधित्व करने वाला डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 3.23 फीसदी की भारी गिरावट के साथ 84.88 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ
बाजार जानकारों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारतीय तेल विपणन कंपनियों को राहत मिलेगी और उनका घाटा कम होगा. लेकिन, अभी पेट्रोल और डीजल के दाम में गिरावट आने की आस करना ठीक नहीं है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत अभी भी अमेरिका-ईरान युद्ध से पहले के रेट से काफी ज्यादा है.




