भारत ने पहले ही ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए चीन की फील्डिंग सेट कर रखी है और अब उसकी सबसे बड़ी ताकत यानी जासूसी पर भी तगड़ा अटैक होने वाला है. अब वो जमाना आ चुका है जब युद्ध मिसाइलों और बारूद से नहीं बल्कि सिग्नलों और तरंगों से जीते जाते हैं. मॉडर्न डे वॉरफेयर में आगे निकलते हुए अब भारत में वो ‘ब्रह्मास्त्र’ बनने जा रहा है, जिसके एक्टिव होते ही चीन और पाकिस्तान एक साथ अंधे हो जाएंगे. इस सुपरपावर को हासिल करने के लिए भारत ने 449 करोड़ रुपए का सौदा कर लिया है और अब हमारी आर्मी की ऑफेंसिव पावर कई गुना बढ़ाने के लिए तैयार है.
मैदानों से लेकर समंदर की लहरों तक, एक ऐसी जंग चल रही है जिसे ‘इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर’ कहा जाता है. इस जंग में जो देश दुश्मन की आंखों पर पट्टी बांधने में कामयाब हो गया, जीत उसी की होती है. भारत ने इसी रणनीति के तहत एक घातक मास्टरस्ट्रोक खेला है, भारतीय नौसेना ने ₹449 करोड़ की लागत से 20 बेहद खतरनाक और एडवांस ‘ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम’ (GNSS) जैमर्स खरीदने का आधिकारिक सौदा पूरा कर लिया है. ये कोई साधारण तकनीक नहीं है, बल्कि ये दुश्मन के नेविगेशन सिस्टम के लिए साक्षात काल है.




