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दल्लीराजहरा –रावघाट रेल लाइन पूरी

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  दल्लीराजहरा.

माओवाद मुक्त दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और जनजातीय अंचलों को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली दल्लीराजहरा –रावघाट नई रेल परियोजना का 95 किलोमीटर लंबा रेल कारिडोर अब पूरा हो गया है। 17.5 किलोमीटर लंबे ताड़ोकी–रावघाट अंतिम खंड का काम पूरा होने के बाद दल्लीराजहरा से रावघाट तक रेल संपर्क विस्तारित हो गया है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है।

लौह अयस्क की सप्लाई लाइन को मिलेगा सहारा

दल्लीराजहरा –रावघाट रेल परियोजना का महत्व केवल यात्री और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है। यह रेल मार्ग भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी ) के लिए लौह अयस्क परिवहन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रावघाट क्षेत्र में लौह अयस्क संसाधनों की उपलब्धता को देखते हुए रेल संपर्क मजबूत होने से अयस्क के परिवहन के लिए बेहतर लाजिस्टिक विकल्प तैयार होगा। इससे सड़क परिवहन पर निर्भरता कम करने और बड़े पैमाने पर माल ढुलाई को रेल नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है।

व्यवस्थित होगी लॉजिस्टिक

बीएसपी के उत्पादन के लिए लौह अयस्क सबसे महत्वपूर्ण कच्चे माल में शामिल है। ऐसे में रावघाट क्षेत्र तक रेल कनेक्टिविटी का विस्तार संयंत्र की दीर्घकालिक कच्चा माल आपूर्ति व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है। रेल के जरिए भारी मात्रा में अयस्क परिवहन होने पर लॉजिस्टिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित करने की संभावना बनेगी।

रोजगार से बाजार तक खुलेगा रास्ता

दल्लीराजहरा –ताड़ोकी के बीच पहले से यात्री रेल सेवा संचालित है। अब ताड़ोकी–रावघाट खंड पूरा होने से दूरस्थ गांवों और जनजातीय क्षेत्रों का रेल नेटवर्क से जुड़ाव और बढ़ेगा। इससे रायपुर और भिलाई जैसे प्रमुख शहरों तक पहुंच आसान होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार के अवसरों तक पहुंच भी सुगम होने की उम्मीद है। रेल संपर्क बढ़ने से कृषि उपज और स्थानीय उत्पादों के परिवहन को भी सुविधा मिल सकती है। इससे क्षेत्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलने की संभावना है। पर्यटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए भी बेहतर परिवहन आधारभूत ढांचा तैयार होगा।