देश में जीएसटी लागू हुए भले ही 9 एक दशक होने को हैं, लेकिन आज भी पेट्रोलियम उत्पादों पर पुराने तरीके से ही टैक्स वसूली की जा रही है. बात चाहे पेट्रोल-डीजल की हो या फिर रसोई अथवा उद्योगों में इस्तेमाल होने वाले गैस की, इन सभी उत्पादों पर आज भी पुरानी व्यवस्था के तहत टैक्स वसूला जाता है. यही कारण है कि छोटे-मझोले उद्यमों ने राज्य सरकार से अपना वैल्यू एडेड टैक्स यानी वैट घटाने की गुहार लगाई है. उनका कहना है कि पश्चिम एशिया संकट की वजह से उत्पादन लागत पर दबाव बढ़ रहा है, लिहाजा वैट में छूट देकर उन्हें राहत पहुंचाई जाए.
मध्यप्रदेश के सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) ने राज्य सरकार से औद्योगिक उपयोग वाली पाइप वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी) पर 14 फीसदी की दर से वसूले जा रहे मूल्य संवर्धित कर (वैट) में कटौती की मांग की है. उद्योग संगठनों का कहना है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण ईंधन महंगा होने से एमएसएमई की उत्पादन लागत बढ़ गई है और पीएनजी पर ऊंचे वैट के कारण उन्हें पड़ोसी राज्यों के उद्यमों से प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ रहा है.




