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नक्सलवाद के अंत के बाद बीजापुर में विकास को मिली नई गति, तीन वर्षों में 90 से अधिक गांवों तक पहुंची बिजली

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कभी नक्सलवाद के कारण विकास की मुख्यधारा से कटे रहे बीजापुर के दूरस्थ और अंदरूनी इलाकों में अब बुनियादी सुविधाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है। पिछले तीन वर्षों में जिले के 90 से अधिक ऐसे गांवों तक बिजली पहुंचाई गई है, जहां पहले विद्युत सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जबकि 50 से अधिक गांवों में विद्युतीकरण का कार्य जारी है। जिले में एक हजार किलोमीटर से अधिक सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। नक्सलवाद के प्रभाव में कमी और बेहतर सुरक्षा वातावरण के कारण अब उन क्षेत्रों तक भी विकास कार्य पहुंच रहे हैं, जहां कभी प्रशासन और निर्माण एजेंसियों के लिए पहुंचना बेहद कठिन था। बुधवार को पत्र सूचना कार्यालय ( PIB ), रायपुर द्वारा जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बीजापुर के सहयोग से गर्ल्स पोर्टा केबिन ऑडिटोरियम में आयोजित विशेष वार्तालाप कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बीजापुर के कलेक्टर श्री विश्वदीप ने जिले में हो रहे विकास कार्यों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी साझा की।

‘‘शांति से विकास की ओर‘‘ विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में कलेक्टर ने कहा कि बीजापुर में विकास की सबसे बड़ी प्राथमिकता प्रत्येक नागरिक तक बुनियादी सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। सड़क, बिजली, पेयजल और डिजिटल कनेक्टिविटी के साथ शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार प्रशासन के प्रमुख एजेंडे में शामिल है।

सड़क, पुल और बिजली से बदल रही तस्वीर- सड़क संपर्क और बिजली की उपलब्धता से जुड़े पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कलेक्टर ने बताया कि जिले में पिछले तीन वर्षों के दौरान 90 से अधिक गांवों तक बिजली पहुंचाई गई है और 50 से अधिक गांवों में विद्युतीकरण का कार्य चल रहा है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। पहले सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण निर्माण कार्यों के लिए सीमित समय ही उपलब्ध हो पाता था। कई स्थानों पर सुबह शुरू हुआ सड़क निर्माण कार्य दोपहर तक रोकना पड़ता था। उन्होंने दोरनापाल-जगरगुंडा सड़क का उदाहरण देते हुए बताया कि वर्ष 2013 में स्वीकृत यह सड़क वर्ष 2025 के अंत तक पूरी हो सकी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पहले इन क्षेत्रों में विकास कार्यों को पहुंचाना कितना कठिन था। अब बदले हुए वातावरण में अंदरूनी क्षेत्रों में भी सड़क और पुल निर्माण के कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। कुंडापुली सहित विभिन्न क्षेत्रों में बरसात के दौरान भी पुलिया निर्माण के प्रयास किए गए हैं। फुंडरी पुल का निर्माण अंतिम चरण में है तथा बेदरे सहित अन्य स्थानों पर भी पुल निर्माण के कार्य किए जा रहे हैं।

शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार प्राथमिकता- शिक्षा एवं स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े सवालों पर कलेक्टर ने कहा कि जिले में बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू करने और उनके बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिले के 55 आदिवासी छात्रावासों के निर्माण और आधारभूत सुविधाओं के विकास का कार्य भी प्राथमिकता में है। इसी तरह इस वर्ष से नया नर्सिंग कॉलेज शुरू करने की पहल की जा रही है। जिला अस्पताल की आवश्यक अधोसंरचना और सुविधाओं को विकसित करना भी प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

पर्यटन और आजीविका से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर- बीजापुर में पर्यटन की संभावनाओं को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में कलेक्टर ने बताया कि जिले में पर्यटन विकास के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व में एक नवंबर से जंगल सफारी शुरू की गई है। वर्तमान में सफारी का मार्ग लगभग नौ किलोमीटर है, जिसे आगे बढ़ाकर 32 से 33 किलोमीटर तक करने की योजना है। इसके अलावा गिद्ध सफारी शुरू करने तथा मट्टी मरका सहित जिले के जलप्रपातों और अन्य प्राकृतिक स्थलों को बेहतर पर्यटन सुविधाओं के साथ विकसित करने की योजना बनाई जा रही है। प्रशासन का प्रयास है कि बस्तर आने वाले पर्यटक अपनी यात्रा में बीजापुर को भी शामिल करें।

ग्रामीणों की आजीविका और आय बढ़ाने के संबंध में उन्होंने कहा कि कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन, उद्यानिकी और अन्य गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हाल ही में नेमेड क्षेत्र के 16 किसानों को उनके खेतों में निर्मित तालाबों के माध्यम से झींगा पालन से जोड़ने की पहल की गई है। इससे किसानों को आय के अतिरिक्त अवसर उपलब्ध होंगे।

मनरेगा के तहत 80 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य स्वीकृत- ग्रामीण विकास और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से संबंधित सवालों पर कलेक्टर ने बताया कि विकसित भारत-जी राम जी योजना के अंतर्गत जिले में 80 करोड़ रुपये से अधिक के कार्य स्वीकृत किए जा चुके हैं। इन कार्यों के माध्यम से ग्रामीणों की जरूरतों के अनुरूप परिसंपत्तियों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें डबरी, तालाब और अन्य उपयोगी सामुदायिक एवं व्यक्तिगत परिसंपत्तियां शामिल हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य कल्याणकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों तक लाभ पहुंचाना भी प्रशासन का लक्ष्य है।

कलेक्टर ने बताया कि जिले की 170 ग्राम पंचायतों में योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए नोडल व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसके माध्यम से आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रमिक कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और बैंक खाते जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीणों को आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

बीजापुर की संघर्ष और विकास यात्रा का हो दस्तावेजीकरण- पत्रकारों की भूमिका और जिले के ऐतिहासिक घटनाक्रमों के दस्तावेजीकरण के संबंध में कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन और सरकार की योजनाओं एवं प्रयासों को जनता तक पहुंचाने में मीडिया की अहम भूमिका है। उन्होंने बीजापुर के पिछले चार दशकों के संघर्ष, चुनौतियों और विकास की यात्रा का दस्तावेजीकरण करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने पत्रकारों के सहयोग से जिले में हुए महत्वपूर्ण विकास कार्यों और ऐतिहासिक घटनाओं को संकलित कर एक कॉफी टेबल बुक तैयार करने का प्रस्ताव रखा, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस परिवर्तन और इसके पीछे के संघर्ष को जान सकें।

बेहतर सुरक्षा वातावरण से विकास कार्यों को मिली गति: पुलिस अधीक्षक- कार्यक्रम में जिला पुलिस अधीक्षक श्री उमेश गुप्ता ने बीजापुर में नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष, सुरक्षा बलों के योगदान और वर्तमान सुरक्षा परिदृश्य पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बीजापुर में शांति और विकास की वर्तमान स्थिति लंबे संघर्ष, सुरक्षा बलों के बलिदान और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने नक्सल विरोधी अभियानों के दौरान जवानों के सामने आई चुनौतियों, आईईडी विस्फोटों तथा नागरिकों एवं सुरक्षा कर्मियों की क्षति का उल्लेख करते हुए कहा कि इस यात्रा में योगदान देने वाले सभी लोगों को याद रखना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि बेहतर सुरक्षा वातावरण बनने से अंदरूनी क्षेत्रों में प्रशासन की पहुंच बढ़ी है और सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य विकास कार्यों को गति मिली है।

कार्यक्रम में पत्रकारों ने भी बीजापुर में नक्सलवाद के प्रभाव, विकास कार्यों, प्रशासनिक पहुंच, नागरिक सुविधाओं और क्षेत्र की बदलती परिस्थितियों से जुड़े सवाल पूछे। कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए जिले में शांति, सुरक्षा और विकास की प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की। अधिकारियों ने इस बदलाव में मीडिया की सकारात्मक और जिम्मेदार भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।