भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने एक बार फिर अपनी शानदार वापसी का प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया है। सिंधु ने रविवार को जापान ओपन के फाइनल में घरेलू खिलाड़ी अकाने यामागुची को सीधे गेम में हराकर पहली बार इस प्रतिष्ठित खिताब पर कब्जा कर लिया। इस जीत के साथ वह जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।
बता दें कि दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने फाइनल मुकाबले में तीन बार की विश्व चैंपियन अकाने यामागुची को 21-17, 21-17 से मात दी। यह सिंधु का पहला सुपर 750 स्तर का खिताब भी है। इस जीत ने उनके दो साल से ज्यादा समय से चले आ रहे खिताबी सूखे को खत्म कर दिया।
गौरतलब है कि सिंधु का इससे पहले बड़ा खिताब वर्ष 2019 में आया था, जब उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने 2024 में सैयद मोदी अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया था, लेकिन जापान ओपन की जीत उनके करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गई है।
फाइनल मुकाबले में सिंधु शुरुआत से ही आत्मविश्वास में नजर आईं। उन्होंने अपने मजबूत नेट खेल का शानदार इस्तेमाल किया और कई मौकों पर यामागुची को ऊंचे शॉट खेलने के लिए मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने क्रॉस कोर्ट स्मैश और तेज शॉट्स की मदद से लगातार अंक हासिल किए।
पहले गेम में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। शुरुआती दौर में स्कोर बराबरी पर रहा, लेकिन सिंधु ने 8-6 की बढ़त बनाई। यामागुची ने वापसी करते हुए बढ़त हासिल की, लेकिन सिंधु ने लंबी रैलियों में धैर्य दिखाया और 11-11 की बराबरी के बाद मैच पर नियंत्रण बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद उन्होंने शानदार खेल दिखाते हुए पहला गेम 21-17 से अपने नाम किया।
दूसरे गेम में सिंधु ने शुरुआत से ही दबाव बनाए रखा और 8-3 की बढ़त हासिल कर ली। हालांकि यामागुची ने वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ी ने अपनी लय नहीं खोई। सिंधु ने लगातार तेज स्मैश और सटीक शॉट्स के जरिए बढ़त बनाए रखी और दूसरा गेम भी 21-17 से जीत लिया।
मौजूद जानकारी के अनुसार यह मुकाबला सिंधु के लिए खास इसलिए भी था क्योंकि वह लंबे समय से यामागुची के खिलाफ पूर्ण मुकाबले में जीत हासिल नहीं कर पाई थीं। जापानी खिलाड़ी के खिलाफ उनकी आखिरी पूरी जीत 2022 थाईलैंड ओपन में आई थी।
वहीं अकाने यामागुची जापान ओपन के अपने छठे फाइनल में खेल रही थीं, लेकिन सिंधु के शानदार प्रदर्शन के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इस ऐतिहासिक जीत के साथ पीवी सिंधु ने साबित कर दिया है कि वह अभी भी विश्व बैडमिंटन की शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं और आने वाले टूर्नामेंटों के लिए भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदों को और मजबूत किया है।




